पवित्र मक्का मदीना और हज का इतिहास

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1. कहाँ है मक्का मदीना?

सऊदी अरब की भूमि पर इस्लाम का जन्म हुआ, इसलिए मक्का और मदीना जैसे पवित्र मुस्लिम तीर्थस्थल उस देश की थाती हैं। मक्का में पवित्र काबा है, जिसकी प्रदक्षिणा कर हर मुसलमान कृतार्थ हो जाता है। यही वह जगह है जहां हज यात्रा सम्पूर्ण होती है। इस्लामी तारीख के अनुसार 10 जिलहज को संसार के कोने-कोने से मुसलमान इस पवित्र स्थान पर आते हैं, जिसे “ईदुल अजहा’ कहा जाता है।

2. कहाँ से मिलती है सिर्फ मुस्लिमों को इज़ाज़त?

मकका पर पहुंचने के लिए प्रमुख नगर जेद्दाह है। यह जगह एक बंदरगाह भी है और अंतरराष्ट्रीय हवाई पट्टी का मुख्य स्थान भी। जेद्दाह से मक्का जाने वाले रास्ते पर ये नियम लिखे होते हैं कि यहां मुसलमानों के अलावा कोई भी और धर्म का नागरिक अन्दर नहीं कर सकता। अधिकतर सूचित करने वाले नियम अरबी भाषा में लिखी होती हैं, जिसे दूसरे देशों के नागरिक बहुत कम जानते हैं।
3. ‘काफिरों’ का अंदर आना प्रतिबंधित

अब तक इन सूचनाओं में यह भी लिखा जाता था कि “काफिरों’ का अंदर आना सख्त मना है। किंतु इस बार “काफिर’ शब्द के जगह पर “नान मुस्लिम’ यानी जो मुस्लिम नहीं है उनका प्रवेश मना है, लिखा था। “काफिर’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है “इनकार करना’ अथवा “छिपाना’। वास्तव में “काफिर’ शब्द का इस्तेमाल नास्तिक के लिए किया जाता है। दुर्भाग्य से “काफिर’ शब्द को हिन्दुओं से जोड़ दिया, जो बेहद गलत है। ईसाई, यहूदी, पारसी और बौद्ध भी उस मना किये हुए क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते।

4. प्रसिद्ध अवधारणाएं: मक्का मक्केश्वर शिवजी का मंदिर था।

मुसलमानों के सबसे बड़े पवित्र मक्का के बारे में कहते हैं कि वह मक्केश्वर शिवजी का मंदिर था। वहां काले चटान का बहुत बड़ा शिवलिंग था जो टूटी हुई अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके बारे में चर्चित इतिहासकार स्व पी.एन.ओक ने अपनी किताब ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में बहुत लंबाई और चौड़ाई से लिखा है।

5. प्रसिद्ध अवधारणाएं: मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था

कहा जाता है की वेंकतेश पण्डित ग्रन्थ ‘रामावतारचरित’ के युद्धकांड प्रकरण में उपलब्ध एक बहुत अद्भुत प्रसंग ‘मक्केश्वर लिंग’ से संबंधित हैं, जो आम तौर पर अन्य रामायणों में नहीं मिलता है। वह प्रसंग काफी दिलचस्प है। शिव रावण द्वारा याचना करने पर उसे युद्ध में विजयी होने के लिए एक लिंग (मक्केश्वर महादेव) दे देते हैं और कहते हैं कि जा, यह तेरी रक्षा करेगा, परन्तु ले जाते समय इसे रास्ते में कहीं पर भी धरती पर नहीं रखना।
6. प्रसिद्ध अवधारणाएं: मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था

रावण आसमान के रास्ते से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसी स्तिथि बनती हैं की रावण को शिवलिंग जमीन पर रखना पड़ता है। वह फिर से शिवलिंग को उठाने का प्रयत्न करता है पर अधिक कोशिस करने पर भी लिंग उस जगह से हिलता नहीं। वेंकतेश पण्डित की माने तो यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक जगह पर स्थित है। सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य भी है जहाँ श्री कृष्ण ने कालयवन नाम के राक्षस का खात्मा किया था।

7. सिर्फ एक अफगाह 

कहते है की अरब में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व शिवलिंग को ‘लात’ कहा जाता था। मक्का के कावा में जिस काली चटान की पूजा की जाती रही है, भविष्य पुराण में उसका वर्णन मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार से पहले इजराइल और अन्य यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट सबूत मिले हैं। लेकिन ये सब कितना सच है – यह हिंसात्मक है। अभी तक तो यह सिर्फ एक उड़ाई हुई ख़बर ही लगती है।

8. प्रसिद्ध अवधारणाएं: काबा का पवित्र झरना

एक और व्यक्तिगत विश्वास बहुत मशहूर है की काबा से जुड़ी है “पवित्र गंगा”। जैसा कि सभी जानते हैं भारतीय संस्कृति में शिव के साथ गंगा और चन्द्रमा के रिश्ते को कभी अलग नहीं किया जा सकता। जहाँ भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित ही मौजूद होती है। काबा के पास भी एक पवित्र झरना पाया जाता है, इसका पानी भी पवित्र माना जाता है। इस्लामिक काल से पहले भी इसे पवित्र (आबे ज़म-ज़म) ही माना जाता था।

9. प्रचलित अवधारणाएं: काबा का पवित्र झरना

आज भी मुस्लिम श्रद्धालु हज के दौरान इस आबे ज़मज़म को अपने साथ बोतल में भरकर ले जाते हैं। ऐसा क्यों है कि कुम्भ में शामिल होने वाले हिन्दुओं द्वारा गंगाजल को पवित्र मानने और उसे बोतलों में भरकर घरों में ले जाने, तथा इसी प्रकार हज की इस परम्परा में इतनी समानता है? इसके पीछे क्या कारण है। मेरी मानें तो ये महज एक सुन्दर इत्तफ़ाक है जिसे हम तोड-मरोड रहे हैं।

10. गुरु नानक ने मकका में किया था प्रवेश

सिख धर्म के सबसे पहले गुरु नानक देव ने जीवन भर हिन्दू और मुस्लिम धर्म की एकता का संदेश दिया और यातायात के बेहद कम साधनों वाले उस दौर में भी पूरे भारत ही नहीं आधुनिक इराक के बगदाद और सउदी अरब के मक्का मदीना तक की यात्रा की।

11. मक्का मे ग़ैर मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं?

इस सवाल का जवाब डॉ जाकिर नाइक की ज़ुबानी आप के सामने रखने की कोशिश है. डॉ जाकिर नाइक ने इस्लाम पर काफी खोज करी है और कई पुस्तके भी लिखीं हैं। उनके हिसाब से – यह सच है कि कानूनी तौर पर मक्का और मदीना शरीफ़ के पवित्र शहरों में ग़ैर मुस्लिमों को प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। आगे बताये गए तथ्यों द्वारा प्रतिबन्ध के पीछे कारणों और औचित्य का स्पष्ट किया गया है।

12. मक्का मे ग़ैर मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं?

जैसे सभी नागरिकों को कन्टोन्मेंट एरिया (सैनिक छावनी) में जाने की आज्ञा नहीं होती वैसे ही हर देश में कुछ न कुछ ऐेसी जगह अवश्य होती हैं जहाँ सामान्य जनता को जाने की अनुमति नहीं होती। सैनिक छावनी में केवल वही नागरिक जा सकते हैं जो सेना अथवा प्रतिरक्षा विभाग से जुडे हों। इसी प्रकार इस्लाम के दो शहर मक्का और मदीना किसी सैनिक छावनी के समान महत्वपूर्ण और पवित्र हैं, इन नगरों में प्रवेश करने का उन्हें ही अधिकार है जो इस्लाम में विश्वास रखते हो।

13. मक्का और मदीना में प्रवेश का वीसा

जब कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की यात्रा करता है तो उसे सर्वप्रथम उस देश में प्रवेश करने का अनुमति पत्र प्राप्त करना पड़ता है। प्रत्येक देश के अपने कषयदे कानून होते हैं जो उनकी ज़रूरत और व्यवस्था के अनुसार होते हैं तथा उन्हीं के अनुसार वीसा जारी किया जाता है। जब तक उस देश के कानून की सभी शर्तों को पूरा न कर दिया जाए उस देश के राजनयिक कर्मचारी वीसा जारी नहीं करते।

14. मक्का और मदीना में प्रवेश का वीसा

वीसा जारी करने के मामले में अमरीका से अधिक कठोर देश है, विशेष रूप से तीसरी दुनिया के नागरिकों को वीसा देने के बारे में, अमरीकी आवर्जन कानून की कड़ी शर्तें हैं जिन्हें अमरीका जाने के इच्छुक को पूरा करना होता है।

15. मक्का और मदीना में अंदर आने का वीसा

जैसे सिंगापुर के इमैग्रेशन फ़ार्म पर लिखा होता है ‘‘नशे की वस्तुएँ स्मगल करने वाले को मृत्युदण्ड दिया जायेगा।’’ यदि मैं सिंगापुर जाना चाहूँ तो मुझे वहाँ के कानून को फॉलो करना होगा। मैं यह नहीं कह सकता कि उनके देश में मृत्युदण्ड का निर्दयतापूर्ण और क्रूर प्रावधान क्यों है। मुझे तो केवल उसी अवस्था में वहाँ जाने की आज्ञा मिलेगी जब उस देश के कानून की सभी शर्तों के पालन करूंगा।

16. मक्का और मदीना में अंदर आने का वीसा

मक्का और मदीना का वीसा अर्थात वहाँ अंदर आने की बुनियादी शर्त यह है कि मुख से ‘‘ला इलाहा इल्लल्लाहु, मुहम्मदुर्रसूलल्लाहि’’ (कोई ईश्वर नहीं, सिवाय अल्लाह के (और) मुहम्मद (सल्लॉ) अल्लाह के सच्चे सन्देष्टा हैं), कहकर मन से अल्लाह के एकमात्र होने का इकष्रार किया जाए और हज़रत मुहम्मद (सल्लॉ) को अल्लाह का सच्चा रसूल स्वीकार किया जाए।

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अगर आपके पास Makka Madina History   और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट me  लिखे हम ese अपडेट करते रहेंगे।

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