पंडित जवाहरलाल नेहरु जीवनी | Jawaharlal Nehru in Hindi

0
48

पंडित जवाहरलाल नेहरु जीवनी 

Jawaharlal Nehru in Hindi
पंडित जवाहरलाल नेहरु की जीवनी आज़ादी के लिये लड़ने वाले और स्पर्धा करने वाले खास महापुरुषों में से जवाहरलाल नेहरु एक थे, वे पंडित जवाहरलाल नेहरु (Pandit Jawaharlal Nehru ) के नाम से जाने जाते थे, जिन्होंने अपने भाषणों से लोगो का भरोशा जीत लिया था। इसी कारण से वे आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री भी बने और बाद में उनके महत्व को उनकी बेटी और पोते ने आगे बढाया।
 
इस श्रेष्ठ महापुरुष के जीवन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी इस प्रकार है –
जवाहरलाल नेहरु की जीवनी
पूरा नाम – जवाहरलाल मोतीलाल नेहरु
जन्म – 14 नवम्बर 1889 जन्मस्थान – इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
पिता – मोतीलाल नेहरु
माता – स्वरूपरानी नेहरु
शिक्षा – 1910 में केब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनटी कॉलेज से उपाधि अच्छे तरह पूरी की। 1912 में ‘इनर टेंपल’ इस लंडन कॉलेज से बॅरिस्ट बॅरिस्टर की उपाधि अच्छे तरह पूरी की।
शादी –श्रीमती कमला देवी
(1916 में) जवाहरलाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और आजादी के पहले और बाद में भारतीय राजनीती के प्रमुख केंद्र बिंदु थे। वे महात्मा गांधी के सहायक के तौर पर भारतीय स्वतंत्रता अभियान के श्रेष्ठ  नेता थे जो आखिर तक भारत को आजाद बनाने के लिए लड़ते रहे और आजादी के बाद भी 1964 में अपनी मौत तक देश की सेवा की।
उन्हें नये जमाने का भारत की रचना करने वाला माना जाता था। पंडित संप्रदाय से होने के कारण उन्हें पंडित नेहरु भी कहा जाता था। जबकि बच्चो से उनके संबंध के कारण बच्चे उन्हें “चाचा नेहरु” के नाम से जानते थे।
वे मोतीलाल जी नेहरु के पुत्र थे, जो एक श्रेष्ठ वकील और राष्ट्रिय समाज सेवक थे।
नेहरु ट्रिनिटी विश्वविद्यालय, कैंब्रिज से स्नातक हुए। जहा उन्होंने ने वकालत की ट्रेनिंग ली और भारत वापिस आने के बाद उन्हें अल्लाहाबाद उच्च न्यायालय में शामिल किया गया। लेकिन उन्हें भारतीय राजनीती में ज्यादा दिलचस्पी थी और 1910 के आजादी अभियान में वे भारतीय राजनीति में कम उम्र में ही शामिल हो गये, और बाद में भारतीय राजनीती का केंद्र बिंदु बने।
1920 में भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल होकर उनके श्रेष्ठ और महान नेता बने, और बाद में पूरी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें एक विस्वास के योग्य सलाहकार माना, जिनमे गांधीजी भी शामिल थे। 1929 में कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में, नेहरु ने ब्रिटिश राज से पूरी तरह छुटकारा पाने की घोषणा की और भारत को पूरी तरह से आजाद देश बनाने की मांग की। नेहरु और कांग्रेस ने 1930 में भारतीय स्वतंत्रता अभियान का मोर्चा संभाला ताकि देश को आसानी से आज़ादी दिला सके।
उनके सांप्रदायिक भारत की योजना को तब सभी का साथ मिला जब वे राष्ट्रिय कांग्रेस के प्रमुख नेता थे। इस से अलग हुई मुस्लिम लीग बहोत कमजोर और गरीब बन चुकी थी। उनके आजादी के अभियान को तब सफलता मिली जब 1942 के ब्रिटिश भारत छोडो अभियान में ब्रिटिश बुरी तरह से पीछे रह गये और उस समय कांग्रेस को देश की सबसे सफल और महान राजनितिक संस्था माना गया था। मुस्लिमो की बुरि हालत को देखते हुए मुहम्मद अली जिन्नाह ने मुस्लिम लीग का तेज़ दुबारा विस्थापित किया। लेकिन नेहरु और जिन्नाह का एक दुसरे की ताकत बाटने का समझौता असफल रहा और आज़ादी के बाद 1947 में ही भारत का विभाजन किया गया। 1941 में जब गांधीजी ने नेहरु को एक बुद्धिमान और योग्य नेता का दर्जा दिया था उसी को देखते हुए स्वतंत्रता के बाद भी कांग्रेस ने उन्हें ही आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में चुना। प्रधानमंत्री बनने के बाद ही, उन्होंने नये भारत के अपने ख्वाब को साकार करने की कोशिश की ।
1950 में जब भारतीय कानून के नियम बनाये गये, तब उन्होंने भारत का आर्थिक, राजनितिक और सामाजिक विकास शुरू किया। विशेषतः उन्होंने भारत को एकतंत्र से लोकतंत्र में बदलने का प्रयाश किया, जिसमे बहुत सारी पार्टिया हो जो समाज की उन्नति करने का काम करे। तभी भारत एक लोकशाही राष्ट्र बन पायेगा। और विदेश निति में जब वे दक्षिण एशिया में भारत का नेतृत्व कर रहे थे तब भारत के विश्व विकास में अभिनव को दर्शाया। नेहरु की नेतागिरी में कांग्रेस देश की सबसे सफल पार्टी थी जिसने हर जगह चाहे राज्य हो या लोकसभा हो विधानसभा हो हर जगह अपनी जीत का परचम लहराया था। और लगातार 1951, 1957 और 1962 के चुनावो में जित हासिल की थी। उनके अंतिम वर्षो में राजनितिक दबाव (1962 के सीनों-भारत युद्ध में असफलता) के बावजूद वे हमेशा ही भारतीय लोगो के दिलो में बसे रहेंगे। भारत में उनका जन्मदिन “बालदिवस” के रूप में मनाया जाता है। पंडित जवाहरलाल नेहरु अर्थात चाचा नेहरु ने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी थी। वे पूरी तरह से भारत को आज़ाद भारत बनाने के लिए ब्रिटिशो के खिलाफ लड़ते रहे। और एक वीर और योग्य नेता साबित हुए। वे हमेशा गांधीजी के आदर्शो पर चलते थे। उनका हमेशा से यह मानना था की, “असफलता तभी आती है जब हम अपने आदर्श, उद्देश और सिद्धांत भूल जाते है.”
एक नजर में जवाहरलाल नेहरु की जानकारी – 1912 में इग्लंड से भारत आने के बाद जवाहरलाल नेहरु इन्होंने अपने पिताजीने ज्यूनिअर बनकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकील का काम शुरु किया।
1916 में राजनीती का काम करने के प्रयोजन से पंडित नेहरू ने गांधीजी से मिले। देश की राजनीती में भारतीय स्वतंत्र आंदोलन में हिस्सा लिया जाये, ऐसा वो चाहते थे। 1916 में उन्होंने डॉ.अॅनी बेझंट इनके होमरूल लीग में प्रवेश किया। 1918 में वो इस संघटने के सेक्रेटरी बने। उसके साथ भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस के कार्य में भी उन्होंने हिस्सा लिया। 1920 में महात्मा गांधी ने शुरु किये हुये असहयोग आंदोलन में नेहरूजी शामिल हुये। इस वजह से उन्हें छह साल की सजा हुई। 1922 – 23 में जवाहरलाल नेहरू जी इलाहाबाद नगरपालिका के मुखिया चुने गये।
1927 में नेहारु जीने सोव्हिएल युनियन से मिले। समाजवाद के प्रयोग से वो प्रभावित हुये और उन्ही विचारो की ओर खीचे चले गए। 1929 में लाहोर में राष्ट्रिय कॉग्रेस के ऐतिहासिक अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गये और इसी अधिवेशन में और इसी अधिवेशन कॉग्रेस ने पुरे स्वातंत्र्य की मांग की इसी अधिवेशन भारतको स्वतंत्र बनानेका निर्णय लिया गया और ‘संपूर्ण स्वातंत्र्य’ का संकल्प पास किया गया। यह फैसला पुरे भारत मे पहुचाने के लिए 26 जनवरी 1930 यह दिन राष्ट्रीय सभा में स्थिर किया गया। हर ग्राम में बड़ी सभाओका आयोजन किया गया। जनता ने स्वातंत्र्य के लिये लढ़नेकी शपथ ली इसी कारन 26 जनवरी यह दिन विशेष माना जाता है।
1930 में महात्मा गांधीजीने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरु किया जिसमे नेहरुजीका शामील होना विशेष दर्जा रखता था। 1937में कॉग्रेस ने प्रातीय कानून बोर्ड चुनाव लढ़नेका फैसला लिया और बहुत बढ़िया यश संपादन किया जिसका प्रचारक भार नेहरुजी पर था। 1942 के ‘चले जाव’ आंदोलन को भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में मुख्य दर्जा है। कांग्रेस ने ये आंदोलन शुरु करना चाहिये इस लिये गांधीजी के मन का तैयार करने के लिए पंडित नेहरु आगे आये। उसके बाद तुरंत सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करके अहमदनगर के जैल कैद किया। वही उन्होंने ‘ऑफ इंडिया’ ये ग्रंथ लिखा। 1946 में स्थापन हुये भारत के मध्यवर्ती सरकार ने पंतप्रधान के रूप नेहरु को चुना। भारत आजाद होने के बाद वो आजाद भारत के प्रथम पंतप्रधान बने। जीवन के आखीर तक वो इस पद पर रहे। 1950 में पंडित नेहरु ने नियोजन आयोग की स्थापना की।
जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार: 1955 में भारत का सर्वोच्च नागरी सम्मान ‘भारत रत्न’ पंडित नेहरु को देकर उन्हें सम्मानित किया गया। जवाहर लाल नेहरू की विशेषता: आधुनिक भारत के शिल्पकार। पंडित नेहरु का जन्मदिन 14 नवम्बर ‘बालक दिन’ के रूप में मनाया जाता है।
जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु: 27 मई 1964 को यह महापुरुष हमेशा के लिये चला गया। आधुनिक भारत के निर्माता एवं विश्व शांति के अग्रदूत के रूप में पं. जवाहरलाल नेहरु का नाम हमेशा इतिहास में अमर रहेगा।

Leave your vote

0 points
Upvote Downvote

Total votes: 0

Upvotes: 0

Upvotes percentage: 0.000000%

Downvotes: 0

Downvotes percentage: 0.000000%

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here